राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुनील कुमार बरनवाल ने जानकारी दी है कि ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (PM-JAY) के तहत अब तक 13 करोड़ से अधिक नि:शुल्क इलाज प्रदान किए जा चुके हैं और 48 करोड़ से ज्यादा कार्ड जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित धोखाधड़ी पहचान तकनीक और उन्नत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म इस योजना की पारदर्शिता और मजबूती को और बेहतर बना रहे हैं।
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था
सुनील कुमार बरनवाल ने कहा, “भारत में निर्मित चिकित्सा वस्तुओं की कीमत कम हो सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उनकी गुणवत्ता में कोई कमी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का पैकेज एक बंडल पैकेज होता है, जिसमें उपचार की प्रक्रिया, दवाएं और कंज्यूमेबल्स सहित सभी खर्च शामिल होते हैं। अलग से इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों के लिए अलग से भुगतान नहीं किया जाता। हालांकि, क्लेम के दौरान इस्तेमाल किए गए इम्प्लांट का बिल और बारकोड लिया जाता है। यदि एक से अधिक इम्प्लांट का उपयोग होता है, तो आईटी सिस्टम स्वतः इसे चिन्हित कर आगे की जांच शुरू करता है।
5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की गारंटी
उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड लाभार्थी परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की गारंटी देता है, जिसके अंतर्गत लगभग 2,000 चिकित्सा प्रक्रियाएं शामिल हैं। योजना का दायरा बढ़ाते हुए कार्ड निर्माण की प्रक्रिया निरंतर जारी है, जिससे आने वाले समय में 7 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को कवर किया जाएगा।
2 लाख करोड़ से अधिक की राहत
NHA के सीईओ ने कहा कि पिछले 8 वर्षों में आयुष्मान भारत योजना के तहत जितने गरीब परिवारों का इलाज हुआ है और उनके पैसे बचे हैं, वह एक अभूतपूर्व उपलब्धि है। अब तक 13 करोड़ से अधिक इलाजों पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है, जिससे आम जनता को सीधे तौर पर बड़ी वित्तीय राहत मिली है।
