रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का पुरजोर समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस वैश्विक शासन प्रणाली में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने का पक्षधर है।
1. भारत और ब्राजील के दावे का समर्थन
रूस के विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मॉस्को एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के प्रतिनिधित्व का विस्तार करने के पक्ष में है। उन्होंने पुष्टि की कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत और ब्राजील की उम्मीदवारी का समर्थन करता है।
यह उच्च स्तरीय समर्थन वैश्विक शासन सुधारों पर रूस की आधिकारिक नीति को रेखांकित करता है, जो ग्लोबल साउथ के अधिकारों की वकालत करने वाले ब्रिक्स (BRICS) घोषणापत्रों के अनुरूप है।
2. पश्चिमी देशों के विस्तार का विरोध
सर्गेई लावरोव ने UNSC सुधारों में पश्चिमी देशों को और सीटें दिए जाने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने विशेष रूप से जर्मनी और जापान का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों को कोई अतिरिक्त सीट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वे वर्तमान में सैन्यवाद (militarism) और प्रतिशोध की नीति (revanchism) के रास्ते पर हैं।
3. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कुल 15 सदस्य होते हैं:
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5 स्थायी सदस्य (वीटो पावर के साथ): चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका।
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10 अस्थायी सदस्य: जो दो-वर्षीय कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं।
