राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन किया और कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने सपनों को साकार करने का अवसर देने का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, किसानों, श्रमिकों, खिलाड़ियों, कलाकारों, सुरक्षाबलों और समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान की सराहना की। उन्होंने संविधान के मूल्यों, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने की अपील की।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत की समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को आधुनिक विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़ने पर जोर दिया।
उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने और विस्थापन का दर्द झेलने वाले लाखों लोगों को भी याद किया। साथ ही, देश की एकता में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को नमन किया।
गरीबों, किसानों और वंचितों के कल्याण पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले वर्षों में समावेशी विकास को गति मिली है। उन्होंने गरीबों और वंचित वर्गों के लिए संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर लाने, बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने और खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं से भी बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला है।
उन्होंने डिजिटल क्रांति और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार का भी उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल भुगतान गांवों और छोटे कारोबारियों तक पहुंच चुका है, जबकि हाईवे, रेलवे, वाटरवे और एयरवे के विस्तार से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं।
बेटियां और युवा बन रहे भारत की ताकत
राष्ट्रपति मुर्मु ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां शिक्षा, कृषि, रक्षा, खेल और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करोड़ों महिलाओं और लखपति दीदी अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और स्टार्टअप, विज्ञान, तकनीक तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ संकल्प
राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट और दृढ़ है। साथ ही नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास और नई उम्मीद का वातावरण बन रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति पर जोर
राष्ट्रपति ने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर आने वाली पीढ़ियों का भी अधिकार है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ जैसे अभियानों की भावना के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण में सभी से योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने भारत की विदेश नीति में शांति, सहयोग, संवाद और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को प्रमुख आधार बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंत में विश्वास जताया कि सरकार के प्रयासों और समाज की सक्रिय भागीदारी से भारत के गांवों, शहरों और प्रत्येक परिवार का जीवन बेहतर बनेगा। उन्होंने देशवासियों से सर्वसमावेशी देशप्रेम की भावना के साथ स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय यात्रा में योगदान देने का आह्वान किया।
