विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करते हुए चल रहे वैश्विक संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की अपील की है।
1. वैश्विक संघर्षों का प्रभाव और शांति की अपील
विदेश मंत्री ने कहा कि युद्धों का दुष्परिणाम केवल सीधे तौर पर शामिल देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दूर-दराज के क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
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रूस-यूक्रेन संघर्ष: विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान को दोहराया जिसमें युद्ध को तुरंत समाप्त करने की बात कही गई थी।
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खाड़ी और समुद्री सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती शत्रुता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि लाल सागर से लेकर काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। भारत ने खाद्य पदार्थों और ऊर्जा संसाधनों की स्थिर वितरण प्रणाली बनाए रखने पर जोर दिया।
2. आतंकवाद पर सख्त रुख
एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने के अपने अधिकार का प्रयोग करेगा। उन्होंने सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) को बेनकाब कर उसका मुकाबला किया जाना चाहिए।
3. ग्लोबल साउथ और ‘4F संकट’
विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के सामने खड़े ‘4F संकट’ — भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertilizer) और वित्त (Finance) की सुरक्षा — को रेखांकित किया।
उन्होंने बताया कि भारत 78 देशों में 600 प्रमुख विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जो बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण से जुड़ी हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि और सार्वजनिक सेवाओं ने मानवता के छठे हिस्से (1/6 आबादी) के भविष्य को बेहतर बनाया है।
4. तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
वैश्विक व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज वित्त, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीक तक, हर चीज का ‘हथियारीकरण’ (Weaponisation) किया जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुसार अपने AI मॉडल विकसित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। भारत ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी में AI को एक प्रमुख घटक बनाएगा ताकि यह लोगों को सशक्त बनाने और आर्थिक विकास में मदद कर सके।
