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चीनी की कीमतों में तेजी के लिए एथेनॉल उत्पादन जिम्मेदार नहीं: केंद्र सरकार

Posted on August 21, 2026August 21, 2026 by admin

केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ने वाली धारणा को गलत बताया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गया है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा समय में एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्के का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का प्रमुख कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का उपयोग नहीं है।

कई वजहों से बढ़ रही चीनी की कीमतें

सरकार के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण हैं। इनमें अनुमान से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले मांग में वृद्धि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी और बाजार में कुछ हिस्सों द्वारा सट्टेबाजी एवं जमाखोरी शामिल हैं।

मौजूदा सीजन में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख मीट्रिक टन था। गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ अत्यधिक बारिश से हुए जलभराव ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है।

घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक

सरकार ने कहा कि अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद अक्टूबर में नए क्रशिंग सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी की आपूर्ति में कमी केवल भारत की समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर देखने को मिल रही है।

2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। मौसम को लेकर बनी चिंताओं ने भी वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है। 30 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त 2026 तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमतों में 16 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

एथेनॉल से चीनी उद्योग को मिला सहारा

मंत्रालय के अनुसार, भारत में सामान्य तौर पर हर साल करीब 320-340 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत लगभग 280-290 लाख मीट्रिक टन रहती है। उत्पादन खपत से अधिक होने पर अतिरिक्त स्टॉक जमा हो जाता है, जिससे चीनी मिलों की पूंजी फंसती है और गन्ना किसानों को भुगतान में देरी की स्थिति बन सकती है।

सरकार ने कहा कि अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने से इस समस्या को कम करने में मदद मिली है। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में भी सहायता मिली है।

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