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बालाघाट के जनजातीय इलाकों में बुखार के प्रकोप पर सख्त निगरानी: केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त अभियान, पिछले 7 दिनों में खसरे का कोई नया मामला नहीं

Posted on September 6, 2026September 6, 2026 by admin

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर ब्लॉक के जनजातीय क्षेत्रों में जुलाई के दूसरे सप्ताह से सामने आए बुखार, चकत्ते और मौतों के मामलों के बाद केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान शुरू किया है। प्रभावित दुर्गम और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की बस्तियों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत की जा रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा और NJORT की तैनाती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12 अगस्त 2026 को ‘राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम’ (NJORT) को बालाघाट भेजा गया। इसमें जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) और ICMR के विशेषज्ञ शामिल हैं। ICMR जबलपुर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की टीमें भी लगातार वैज्ञानिक जांच और निगरानी कर रही हैं।

मैदानी स्तर पर चल रही व्यापक स्वास्थ्य कार्रवाई

  • मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU): दुर्गम इलाकों के लिए 6 मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं। निगरानी नेटवर्क को 3 गांवों से बढ़ाकर लगभग 50 गांवों तक विस्तारित किया गया है।

  • जांच और उपचार: अब तक 32,433 लोगों की चिकित्सीय जांच की गई है। चिन्हित 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 379 बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

  • सघन टीकाकरण: प्रकोप-प्रतिक्रिया अभियान के तहत 1 से 10 वर्ष के 14,637 बच्चों को खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी गई है।

  • स्वच्छता और रोकथाम: 600 से अधिक पेयजल स्रोतों को शुद्ध किया गया है, 4,338 घरों में कीटनाशक छिड़काव और फॉगिंग अभियान पूरा किया गया है।

कुपोषण और बाल स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

अभियान के दौरान 7,711 बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) पाया गया, जिनमें से 518 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया गया। साथ ही, राज्य के ‘दस्तक 2026’ अभियान के तहत लगभग 1.58 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गई और विटामिन-ए की खुराक दी गई।

स्थिति नियंत्रण में, 7 दिनों से खसरे का नया केस नहीं

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, पिछले सात दिनों में बालाघाट में खसरे का कोई भी नया मामला दर्ज नहीं हुआ है। मौतों की समीक्षा पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध साक्ष्यों में खसरा, मलेरिया, कुपोषण, डिहाइड्रेशन और एनीमिया जैसी विभिन्न स्थितियां पाई गई हैं। कई मौतें घर पर होने के कारण पर्याप्त दस्तावेज नहीं थे, इसलिए किसी एक बीमारी या रोगजनक को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।

फिलहाल, सोंगुड्डा और कुंडेकासा जैसे क्षेत्रों में अस्थायी अस्पताल और स्वास्थ्य शिविर लगाकर अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

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