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जन्माष्टमी पर देश भर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार का अनुमान; ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ को मिला बड़ा बढ़ावा

Posted on September 3, 2026September 3, 2026 by admin

देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में खरीदारी की भारी चहल-पहल है और घरों व मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। यह पर्व न केवल अपार आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ को भी बड़ी गति दे रहा है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के अनुसार, इस वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है।

व्यापार में 30 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी का अनुमान

सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि वर्ष 2024 में जन्माष्टमी का व्यापार करीब 25 हजार करोड़ रुपये और 2025 में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये रहा था। इस वर्ष ग्राहकों की बढ़ती मांग, धार्मिक पर्यटन में इजाफे और डिजिटल कॉमर्स के प्रसार के चलते कारोबार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है।

‘वोकल फॉर लोकल’ का दिख रहा व्यापक असर

पीएम नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का असर त्योहारों के बाजार पर साफ देखा जा रहा है। विदेशी सामानों के बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता मिलने से स्थानीय कारीगरों, कुटीर उद्योगों, मूर्तिकारों, फूल उत्पादकों, डेयरी क्षेत्र, कपड़ा व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है।

इन प्रमुख वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ी मांग

त्योहार के मद्देनजर बाजार में कई खास चीजों की जबरदस्त मांग है:

  • डेयरी व खाद्य उत्पाद: माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर, मिठाइयां, फल और मेवे।

  • सजावट व पूजा सामग्री: लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, पोशाकें, आभूषण, फूलों की मालाएं और तोरण।

  • सेवाएं व धार्मिक पर्यटन: मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से होटल, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प व्यवसाय को बड़ा संबल मिल रहा है।

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल आध्यात्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि यह लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा एक समावेशी और विकेंद्रीकृत आर्थिक नेटवर्क हैं, जो देश की ‘सनातन व धार्मिक अर्थव्यवस्था’ को मजबूती प्रदान करते हैं।

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