संसद ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने गुरुवार को इस विधेयक को मंजूरी दे दी, जबकि लोकसभा इसे बुधवार को ही पारित कर चुकी थी। विधेयक को केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में पेश किया।
इस संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाना है। नए कानून में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की कैद, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने और दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पुलिस में मामला दर्ज होने के दो माह के भीतर जांच पूरी करना और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करना अनिवार्य होगा।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा देश के प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवा सबसे बड़ी पूंजी हैं और उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने चिकित्सा शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। देश में एम्स संस्थानों की संख्या 7 से बढ़कर 22 हो गई है तथा मेडिकल सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पिछले दशक का सबसे बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि इससे छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता मिली है।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि कांग्रेस विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन इसमें किए गए संशोधन पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। उनका कहना था कि केवल सजा बढ़ाने से परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और पेपर लीक मुक्त नहीं बन सकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों के व्यापक विरोध के बाद यह कदम उठाया है।
चर्चा के दौरान डीएमके के तिरुची शिवा और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने नीट परीक्षा समाप्त करने की मांग दोहराई। रामगोपाल यादव ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने का अधिकार राज्यों को दिया जाना चाहिए।
वहीं भाजपा के बृज लाल और सुधांशु त्रिवेदी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने निष्पक्ष परीक्षाओं के लिए कड़े प्रावधान किए हैं। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक अदालतों और विशेष जांच तंत्र से दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नीट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी समान अवसर उपलब्ध कराए हैं।
एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, जदयू के संजय कुमार झा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कांग्रेस के मुकुल वासनिक, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, एआईएडीएमके के एम. थम्बीदुरई, वाईएसआरसीपी के वाई.वी. सुब्बा रेड्डी, बीजेडी के संतृप्त मिश्रा, राजद के मनोज झा, माकपा के जॉन ब्रिटास तथा केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित कई सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने मंत्री के जवाब के समय सदन से वॉकआउट भी किया। विधेयक पारित होने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
